डाक टाइम्स न्यूज समाचारपत्र ब्यूरो महराजगंज ।
अभी कुछ रोज पहले की ही बात है जनपद महराजगंज सुखे की ओर अग्रसर था किसान अपनी फसलों को लेकर हैरान परेशान आसमान की तरफ देख रहा था इंद्र देव को रीझाने के लिए तमाम युक्तियां हो रही थी।
फिलहाल इन्द्र देव की कृपा जनपद वासियों पर हुई बारिश की कुछ बूंदें धरती पर पड़ने लगी किसानों ने राहत की सांस ली।


लेकिन इस बरसात ने सरकारी तंत्र का बरसों से किए गए भागीरथ प्रयास की पोल महाव नाले ने खोल दिया । हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी महाव नाला स्थानीय किसानों के बर्बादी का इबारत लिख दिया और टूट गया।
ऐसा नहीं है कि सरकारी अमला हर वर्ष की भांति इस वर्ष अपनी संवेदनशीलता नहीं दिखाई। तत्काल डी एम महराजगंज के साथ संमवंधित जिम्मेदार भी मौके पर पहुंचे और त्वरित कार्रवाई करते हुए टूटे तटबंध को मिट्टी की बोरियों से भर कर धारा प्रवाह को नियंत्रित करने का फरमान जारी किया।
बरसों से यही होते आ रहा है हर वर्ष महाव नाला बरसात में टूटता है और जिले के जिम्मेदार पहुंचते हैं फरमान जारी होता है हर वर्ष लाखों का प्रस्ताव बनाकर सिंचाई विभाग और वन विभाग महाव नाले का सफाई से लेकर मरम्मत कार्य कराते हैं लेकिन महाव नाला है कि अपनी आदत से बाज नहीं आता हर साल टूटता है।
महाव नाले का हर वर्ष टूटना सरकारी नीति-नियंताओं के कार्य शैली और नियती पर सवालीयां निशान खड़ा करता है महाव नाले पर विगत वर्षो में जितनी धनराशि वर्षवार खर्च हुए हैं उतनी धन राशि में एक स्थाई निदान हो जाना चाहिए लेकिन सरकारी तंत्र हर वार नेपाल के पहाड़ों पर भारी बारिश होने को महाव नाले के टूटने का कारण बता अपनी नाकामियों पर पर्दा डालती रहती है आखिर ऐ सब कब-तक ?

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