डाक टाइम्स न्यूज समाचारपत्र ब्यूरो महराजगंज।
उत्तर प्रदेश का जनपद महराजगंज के नौतनवा तहसील में बहने वाली पहाड़ी नाला महाव नाला किसानों के त्रासदी का कारक है और किसानों के लिए अभी श्राफ भी ।
बरसों से जिले के जिम्मेदार ओहदेदार अपने कर्तव्यों का निर्वहन अपने अपने ढंग और आदेशों की फरमानी के अनुसार करते आ रहे हैं और सरकारी धन को पानी की तरह बहा रहे हैं । लेकिन महाव नाले की समस्या बदस्तूर कायम है ।


जनपद महराजगंज के तेज तर्रार कहे जाने वाले वर्तमान डी एम भी अपने पुर्वरती समकक्षों की भांति महाव नाले की समस्या के समाधान हेतु करोड़ों की कार्य योजना बना कर किसानों के उद्धार का प्रयास किया लेकिन सिंचाई विभाग और वन विभाग के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा महाव नाले की कार्ययोजना में सरकार का करोड़ रुपए पुनः पानी की धार में बह गए। जिलाधिकारी महराजगंज वन विभाग और सिंचाई विभाग की भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए पिछले सोमवार को टूटे महाव नाले के तटबंध को मनरेगा योजना के तहत पुनः मरम्मत कराने का फरमान जारी कर दिया है।


वैसे तो जनपद में किसी संस्था/विभाग द्वारा किसी हुए कार्य पर पांच साल तक दुबारा कार्य न कराने का आदेश भी लागू हैं लेकिन महाव नाले पर जिलाधिकारी महराजगंज ही इस आदेश की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं अभी महाव नाले पर वित्त वर्ष 2022-23 के मई जून में ही सिंचाई विभाग द्वारा उक्त महाव नाले की सिल्ट सफाई कर तटबंध का मरम्मत कर सरकार के लाखों रुपए खर्च किए लेकिन तटबंध अगस्त माह में ही लगभग दो महीने बाद ही टूट गया और भ्रष्टाचार की कलई खुल गई उसी कार्य को पुनः जिलाधिकारी के निर्देश पर मनरेगा योजना के तहत देव घट्टी के मजदूरों से कराया जा रहा है ऐसे में अपने ही आदेश की धज्जियाँ जिलाधिकारी महराजगंज द्वारा किया जा रहा है।


महाव नाला नेपाल राष्ट्र के सोनल के निकट पहाडो से निकल कर भारतीय सीमा में जनपद महराजगंज के नौतनवा तहसील में प्रवेश कर सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग महराजगंज के घने जंगलों से होकर गुजरती है वक्राकार महाव नाला हेड से सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग में प्रवेश करने तक लगभग 67 जगहों पर घुमावदार होकर सोहगीबरवां के मधवलीया रेंज के जंगलों में प्रवेश कराती है और यही से शुरू होता है महाव नाले का बार बार हर साल टूटने का कारण महाव नाला बरसाती नाला है भारतीय सीमा में प्रवेश कर मधवलीया रेंज में प्रवेश तक महाव नाला बीस से तीस मीटर तक चौड़ा है लेकिन जंगल में प्रवेश करने पर यह चौड़ाई मुस्किल से पन्द्रह से बीस मीटर ही रह जाती है ।

जंगलों में प्रवेश के बाद वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के जटिल प्रावधानों और बन विभाग की उदासीनता के कारण वन क्षेत्र में पड़ने वाला महाव नाला सिल्ट और झाड़ झंखाड से पटा पड़ा है जिसकी सफाई न हो पाने से हेड का पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता है।
वन क्षेत्र में कुछ वर्ष पहले वन विभाग द्वारा उक्त महाव नाले की सफाई मनरेगा योजना के तहत किया गया था जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई थी और वन विभाग के कई जिम्मेदार इस भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए गए थे
ऐसा नहीं है कि वन विभाग इस वर्ष महाव नाले के सफ़ाई का कार्य नहीं किया है स्थानीय सगरहवां गांव के लोग बताते हैं कि वन विभाग लगभग सात से आठ सौ मीटर वन प्रवेश स्थल पर जेसीबी मशीन से महाव नाला की सफाई कार्य कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है।

ऐसे में महाव नाले से हर साल हो रहे किसानों की बरबादी का मूल कारण भ्रष्टाचार जिम्मेदारो की उदासीनता ,वन विभाग का जटील कानून और वन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार ही कारक है अब देखना यह है कि इन भ्रष्टाचार में लिप्त सिंचाई विभाग और वन विभाग पर डी एम महराजगंज त्वरित कार्रवाई कर पाते हैं कि नहीं।

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