डाक टाइम्स न्यूज समाचारपत्र ब्यूरो महराजगंज ।
बड़े कारोबार का छोटा नाम कबाड़ शाब्दिक अर्थ में टूटा फुटा सामान या रद्दी वस्तुओं का कारोबार मन:स्थल में नकारात्मक भाव उत्पन्न करने वाला कारोबार कबाड़ का करोबार है। लेकिन आमदनी के लिहाज से कई गुना ज्यादा मुनाफा कमाने का जरिया भी, इस गोरखधंधे में करोड़ों का कारोबार कब और कैसे हो जाता है किसी का ध्यान नहीं जाता है, जिम्मेदार भी इस गोरखधंधे के नकारात्मक भाव कबाड़ का खुबसूरती से स्तेमाल कर आम जनमानस को धोखा दे इस धंधे को पलने का सुअवसर प्रदान करते हैं और आंकड़ों की बाजिगरी में अवैध को वैध बताने में कोई संकोच नहीं करते।
जनपद महाराजगंज में कबाड़ के कारोबार में विना नियमों और शर्तों का पालन किए हुए वैसे तो तमाम कारोबार फल फुल रहें हैं लेकिन निचलौल कस्बे में रामनरेश गुप्ता की चमन गंज पुल पर स्थित दुकान व साईं ट्रेडर्स बाली गोरखपुर रोड़ पर स्थित दुकान बिना सरेंडर किए हुए गाड़ियों को काट कर बेचने का हब बना हुआ है।

रामनरेश गुप्ता की कबाड़ की दुकान चमनगंज पुल                                 वीडियो.                                   

 

           साईं ट्रेडर्स साधु के दुकान का वीडियो           

करोड़ों रुपए की दुकान साईं ट्रेडर्स बाली में गोरखपुर रोड़ पर स्थित है जिसे साधु कबाड़ी की बेटी संचालित करतीं हैं अनगिनत गाड़ियां काट कर उपयोगी सामानों की विशाल भंडारण करने वाली यह कारोबारी महिला कबाड़ के भाव गाड़ियां खरीद कर उनके पार्ट महंगे दामों में बेचती है।

डाक टाइम्स समाचार पत्र के कैमरे में कैद साईं ट्रेडर्स की संचालिका कारोबारी का बयान 

 

इस मुद्दे पर जब डाक टाइम्स समाचार पत्र की टीम कट रही गाड़ियों के बावत जानकारी लेने सहायता सम्भागीय कार्यालय महराजगंज पहुंची तो वहां कार्यालय का मुख्य दरवाजे पर ताला लगा हुआ मिला बाहर तमाम जन मानस हलकान परेशान खिड़कियों तथा पिछे के दरवाज़े पर दलालों के चंगुल में फंसे मिलें उन्हें आर टी ओ से मिलने नहीं दिया जा रहा था दलालों द्वारा ही आर टी ओ से संवाद हो रहे थे।
फिलहाल पिछे के रास्ते से ही डाक टाइम्स समाचार पत्र की टीम अंदर दाखिल हो ए आर टी ओ से मिली जहां एक आर टी ओ का पारा सातवें स्थान पर था जब टीम के सदस्यों ने गाड़ियों के कटने और सरेंडर करने की प्रक्रिया की जानकारी का सवाल किया तो ए आर टी ओ ने कहा कि इस संदर्भ में कोई बाइट नहीं देना है जाकर पी० टी० सी० मारकर खबर बना लें।

एक नज़र उप संभागीय परिवहन अधिकारी   महराजगंज का नज़ारा

 

डाक टाइम्स न्यूज समाचार संवाददाता का उप संभागीय परिवहन अधिकारी महराजगंज के कार्यालय के बाहर से

पीटीसी

3 COMMENTS

  1. Appreciate this post बिना सरेंडर कराएं ही कट रही है निचलौल में राम नरेश गुप्ता व साई ट्रेडर्स साधु के कबाड़ की दुकान पर पुरानी गाड़ीयां, आर.टी.ओ महराजगंज के पास नहीं है ऐसी गाड़ियां का ब्यौरा, हो रहा करोड़ों का व्यवसाय. Let me try it out.

  2. ये बात बिल्कुल सच है कि कबाड़ शब्द छोटा है और इसमें कमाई बहुत अधिक है और पत्रकार महोदय ने ये बहुत ही अच्छा कार्य किया है कि उन दुकानों को चिन्हित कर सामने लाया है जो बिना सरेंडर के गाड़ियों को कट रहे हैं ।
    लेकिन ये कहना कुछ हद तक उचित नहीं है कि कम दाम में खरीदकर महंगे में बेचा जा रहा है क्योंकि यह उनका अपना अधिकार है ऐसा इसलिए है क्योंकि अभी तक हमारी सरकार ने कोई रिपिरिंग पॉलिसी नहीं ला पाई है जिसमे कंपनियों को पार्ट पुर्जे तब तक उपलब्ध कराए रखने कि जरूरत है जब तक उनकी गाडियां मार्केट में है। , दूसरी बात पिछले एक साल से जो स्टील के भाव में असंभवनीय उतार चढाव आया है उसने सभी छोटे बड़े व्यापारीयों को सड़क पर खड़ा करने जैसा हाल कर दिया है।ये बात अलग है कि कुछ व्यापारी लालच मे आकर बिना सरेंडर कराए गाड़ियों को काट रहे हैं लेकिन मै कहूंगा कि इसमें सहयोग हमारे सिस्टम और उनका भी है जिन्होंने गाड़ी को बेचा है ।
    क्योंकि स्क्रैप पॉलिसी के अनुसार सिस्टम को उन गाड़ियों की आरसी की जांच करनी चाहिए जो अपने अंतिम अवधि(expiry date ) पार कर चुके हैं और आज भी सक्रिय है लेकिन गाडियां कट चुकी हैं। इससे कई तरह से लाभ भी हैं। जैसे चोरी, फेक नंबर प्लेट आदि को नियंत्रित किया जा सकता है।
    रही बात ये कहने की, कि ये काम कब लोगो को करोड़ों तक पहुंचा देता है तो हमे ये भी जानकारी रखने की जरूरत है कि ये धंधा एक स्वैच्छिक रोजगार भी प्रदान करता है जो ऐसे लोग भी करते है शिक्षा के मामले में बहुत उच्च खिताब हासिल कर चुके है और वे लोग भी करते है जो बिल्कुल भी शिक्षित नहीं है वे लोग भी करते है जिन्हें रोजगार देने के लिए हमारे सरकारों के पास कोई विचार नहीं है जो सरकारी नौकरियों से धक्के खाकर आए है ।
    मै सबको तो नहीं लेकिन कुछ लोगो को जानता हूं जो बहुत ही ईमानदारी से इस काम को शुरू किया जो बिल्कुल निम्न स्तर( साइकिल से शुरू कर) आज ऐसे जगह बनाने में सफल हुए है जिन्होंने बहुत से लोगो को रोजगार देने के साथ साथ एक नवाचार स्थापित किया है और हमारे पर्यावरण को बचाने में सराहनीय भूमिका निभाए हैं।
    ऐसा नहीं है कि ये काम सोचने मात्र से चल पड़ता है इसमें भी उतना ही संघर्ष और हिम्मत की जरूरत है जो अन्य में है क्योंकि जो लोग इस काम को बिल्कुल निम्न स्तर से शुरू करते है उनके लिए हमारे समाज में कई चुनौतिया है ।लोगो के उनके प्रति विचार संदेहपूर्ण हों जाते हैं उन्हें चोर, कपटी , मैले कपड़ो से भेदभाव जैसे नजरों देखते हैं और तो और जिन बेकार वस्तुओं को वे फेंक देते हैं उन्हें उस बेचने में घाटे का सौदा करने जैसा लगता है भले ही उसे कचरे में फेक दे । लोग प्लास्टिक जैसी धरती को नाश करने वाली वस्तु को यूं ही फेक देते है लेकिन यदि कोई कबाड़ी उनके मोहल्ले में जाकर खरीदे तो उन्हे घाटा लग जाता है।
    पत्रकार महोदय से निवेदन है कि यदि वे किसी वस्तु या सिस्टम या संस्था की आलोचना करते हैं तो उसके अन्य विकल्पों की सराहना भी करना चाहिए क्योंकि प्रत्येक काम में यदि नकरामक्ता है तो सकारात्मकता भी होगी ।
    उन व्यक्तित्वों को भी दिखाएं जिन्होंने किसी क्षेत्र में अच्छा काम किया है उनकी सफलता में आने वाली चुनौतियां क्या थीं । हमारे सरकार के पास उनके लिए क्या सहयोग है।

  3. Manoj Kushwaha ji aap 100% sahi h but kuch log hote shop pr aake bolte h ki aap paisa dijiye nhi to photo khich kr adhikari ke pass bhej denge

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