डाक टाइम्स न्यूज समाचारपत्र ब्यूरो महराजगंज ।
महाराजगंज का पुलिस प्रशासन इन दिनों दलालों के चंगुल में पूरी तरह से फसा हुआ है। बतादें की ठूठीबारी कोतवाली में अपहरण के दर्ज मुकदमे में अपहरण कर्ता के पिता से खेत बेचवा दलालों ने 4.5 लाख रुपए वसूल कर लिए और मामला सुलहनामा तक जा पहुंचा है। सूत्रों से मिली खबर के अनुसार थाना ठूठीबारी का एक दारोगा भी इस पूरे प्रकरण में संलिप्त है । जिले की पुलिसिया व्यवस्था पर दलालों का कब्जा साफ देखा जा सकता है यह मामला तब खुला जब भ्रष्ट्राचार निवारण संगठन के कार्यकर्ता ने उक्त अपहरण कर्ता के पिता से बात किया और खेत बेचने की बात उक्त

अभियुक्त के पिता ने कबूल किया । मामला धर्मागत एंगल से भी जुड़ा हुआ है बताया जा रहा है की दो धर्मो के बीच पनपी मोहब्बत में अपहरण हुआ और थाना ठूठीबारी में मुकदमा भी पंजीकृत हुआ था। जिसके दो दिन बाद निचलौल थाना क्षेत्र से लड़का लड़की बरामद भी हुए थे जिस मामले में रामा चौधरी उर्फ अभिमन्यू चौधरी और अमजद नामक दलालो ने उक्त अपहरण कर्ता के पिता से पहले खेत बेचवाया और फिर 4.5 लाख रुपए दारोगा को देने के नाम पर दलाली किया है। इतना ही नहीं यदि पुलिस सूत्रों पर भरोसा किया जाए तो उपरोक्त प्रकरण का सुलहनामा भी निचलौल तहसील परिसर में हुआ है। मजे की बात यह है कि प्रदेश की योगी सरकार से लेकर जिले के कप्तान तक जीरो टॉलरेंस की नीति पर अपराध रोकने हेतु प्रयासरत हैं पर थानों में बैठे भ्रष्ट किस्म के दरोगा और क्षेत्र में घूम रहे दलाल सरकार की नीतियों को धता बताने से बाज नहीं आ रहे हैं और नही इन पर कानूनी शिकंजा ही कसता ही दिख रहा है । जिस मामले में अपहरण का मुकदमा थाने में दर्ज है उक्त मामले में निष्पक्ष जांच के बजाए खेत बेचवा कर दलाली खाने का यह मामला कोई नया नही है पर जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। बताया तो यहां तक जा रहा है की उपरोक्त अमजद और रामा चौधरी उर्फ अभिमन्यू चौधरी नामक व्यक्ति पर भी कई प्रकार के संगीन अपराधों से संबंधित मुकदमे दर्ज हैं पर कोई कार्यवाही होती नही दिख रही है जो जिले के कई थानों में आए दिन सेटलमेंट कराता रहता है जिसका जनपद के भ्रष्ट कई अफसरों और नेताओं से भी साठ गांठ है । इस बाबत ठूठीबारी कोतवाल से जानकारी लेने पर दलाली के पूरे मामले से अंभिज्ञता जाहिर किया गया और रुपए की दलाली से साफ इंकार किया गया है जो घिसा पिटा बयान है पर बड़ा साक्ष्य यह है की आखिर खेत बेचा ही क्यों गया है और सबसे बड़ा सवाल यह है की उपरोक्त अपहरण कर्ता के पिता द्वारा कबुल किया गया कर 4.5 लाख रुपए किसने लिया और किस किस ने लिए कितना हिस्सा लगा और बदले में अपहरण जैसे संगीन अपराधी को कितना फायदा प्रशासनिक स्तर से पहुंचाया गया है।
उपरोक्त मामले में आवश्यकता निष्पक्ष जांच की है यदि निष्पक्ष जांच होता है तो पुलिस का भ्रष्ट चेहरा जहां सामने आएगा वही इस प्रकार के संगीन अपराध को अंजाम देने और उसका बढ़ावा देने वाले दलालों पर अंकुश लग सकेगा।

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