कुशीनगर जिले के बहुचर्चित ग्राम समा रामपुर गोनहा सन् 1947 से ही सुर्खियों में रहा है । रामपुर गोनहा का सम्पूर्ण रकवा 3800 सौ एकड में स्थित है । छोटी गड़क के किनारे बसे गांव रामपुरगोनहा में तत्कालिन राज रियासत पडरौना स्टेट के अधिन रामपुरगोनहा था । पडरौना स्टेट के कुअर अनिरूद्ध प्रताप नारायण सिंह , वासदेव प्रताप नारायण सिंह , वेलभद्र प्रताप नारायण सिंह तथा नेपाल देश से विवाह का लायी गयी रानी रेवती देवी के अधिन गोनहा की खेती बारी चली आ रही थी । पडरौना स्टेट के अधिन खड्डा चीनी मिल में लकड़ी की सप्लाई रमईता घाट के द्वारा जंगल से लकड़ी की सप्लाई होती रही थी । सन् 1950 में देश आजाद हो गया तथा 52 के आमचुनाव लोकसभा के गठन के बाद से राजनेताओं , मंत्री, विधायको के साथ ही स्थानी जनप्रतिनिधियों पटवारियों की निगाहें इस बेसकिमती जमीनों पर पड़ी इन लोगों ने अवैध कब्जा कर फर्जी दस्तावेज के सहारे से रामपुर गोनहा की किमती भूमि को अपने नात रिश्तेदारों के नाम कर खेतीबारी शुरू कर दिया गया । गांव के गरीब जनता मुसहर , आदिवासी , जनजाति , पिछड़ी जाति के जो अनपढ़ गवार थे जो इनके अधिन थे इनके पीछे पीछे चलकर खेती किसानी का कार्य करते रहे । जब देवरिया जिला था जिले स्तर के अधिकारी तथा अधिवक्ता जिनकी निगाहें बची बंजर की भूमि पर पड़ी इन लोगों ने दोनो हाथों से जमीनों को लुटा और अपने नाम से खाता बनवाकर उंची पहुच का लाभ उठाकर जमीनों को कब्जा कर लिया । उ0प्र0 सरकार ने देवरिया जिले में चकबन्दी का कार्य शुरू किया उसीक्रम में हाटा तहसील के अन्तर्गत रामपुर गोनहा में चकबन्दी हेतु सर्वे कार्य शुरू हुआ । सन् 1985 से लेकर 2000 तक चकबन्दी का प्रक्रिया चलती रही । भू – माफिया तथा पूर्व पटवारी पूर्व ग्राम प्रधान के साथ ही खड्डा नगर के कुछ राजनैतिक व्यक्तियों ने जाल फरेब करके रामपुर गोनहा में सैकड़ो एकड़ बंजर भूमि को अपने नाम से करा ली है । जब चको का निस्तारण ( पैमाइस ) तत्कालिन लेखपाल मैनेजर राय के द्वारा किये जाने लगा तथा मौके पर धन लेकर कब्जा कराए जाने लगा तो जनता आक्रोशित हो गयी जनता ने तत्कालिन जिलाधिकारी विनोद शंकर चौबे से शिकायत किया और जिलाधिकारी महोदय ने मौके की स्थली जांच किया । जांच में पाया गया कि चार प्राथमिक विद्यालय है किसी भी विद्यालय के लिए खेल का मैदान नही छोड़ा गया अनु ० जातियों के लिए हरिजन आबादी छोटी गंडक किनारे छोड़ा गया चक मार्ग चक नाली कायम नही किया गया । जनता ने कहा कि 150 एकड़ भूमि पर गांव के रसुकदार लोगों का कब्जा बताया गया था तथा चकबन्दी प्रक्रिया में किये गए धांधली को मौके पर देखा और आदेशित किया कि एसडीएम पडरौना अबैध कब्जा हटवा दें लेकिन चौबे जी स्थानांतरण के बाद भी अवैध कब्जाधारी सरकारी भूमि पर डटे रहे । इधर हल्का लेखपाल चकबन्दी के द्वारा ग्रामवासियों का शोषण उत्पीड़न के खिलाफ किसान लामबन्द होकर कांग्रेसी नेता सिताराम मौर्य श्यामनारायण गुप्ता , राजेंद्र कुशवाहा के अगुवाई में तत्कालिन जिलाधिकारी श्री एस एन पांडेय कुशीनगर का घेराव गांव के दो सौ जनता के साथ पडरौना ओमकार वाटिका स्थित डीएम कैम्प कार्यालय पर किया गया था धरना प्रदर्शन । मा ० जिलाधिकारी महोदय ने प्रकरण को स्वयं सज्ञान में लेकर तत्काल प्रभाव से रामपुर गोनहा की चको का पैमाईस रोक दिया। मौके पर यथा स्थिति कायम हो गयी । मौर्य के नेतृत्व में विधानभवन लखनऊ के सामने ग्रामिणों ने धरना प्रदर्शन कर किसानों ने विरोध जताया । इसके बाद देवरिया सदर के ने0 लो0 पा 0 विधायक दिनानाथ कुशवाहा ने विधानसभा में प्रश्नों के माध्यम से सरकार से पूछा कि रामपुर गोनहा चकबन्दी प्रक्रिया में की गयी धांधली में सरकार क्या कार्यवाही कर रही रही है । तत्कालिन जिला चकबन्दी अधिकारी / उपसंचालक चकबन्दी श्री हुब लाल ने अपने आदेश में चकबन्दी प्रक्रिया की धारा 48 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए रामपुर गोनहा के चकबन्दी की सम्पूर्ण कार्यवाही को दोष पूर्ण मानते हुए तथा पूर्व जिलाधिकारी श्री विनोद शंकर चौबे की स्थलीय निरीक्षण में पाये गए खामियों को ध्यान में रखकर चकबन्दी की समस्त प्रकिया को निरस्त कर दिया । कुछ बड़े किसानों ने हाईकोर्ट की शरण ली हाईकोर्ट रिट पीटीशन दाखिल किया सुनवाई के दौरान माननीय उच्च न्यायलय ने कहा कि चकबन्दी अधिकारी को धारा 48 में पूर्ण अधिकार सरकार के द्वारा मिला हुआ है कि वह अपने विवेक से चकबन्दी प्रक्रिया को दोषपूर्ण पाये जाने पर निरस्त कर सकता है रामपुर गोनहा के सैकड़ों ग्रामिण किसान ने प्रदेश के योगी सरकार से निष्पक्ष चकबन्दी कराने की मांग किया ग्रामिणो ने कहाकि भूमि घोटाले की एसआईटी से जांच कराई जाए ।

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