खड्डा/कुशीनगर: सन्त शिरोमणि गुरु रविदास जी की 6440 वीं जयन्ती मोटर साइकिल जुलूस के साथ नगर के जटाशंकर पोखरे पर धूमधाम से मनाई गई। आज माघी पूर्निमा के दिन सन्त शिरोमणि गुरु रविदास जी का जन्मदिन सम्पूर्ण भारत में धुम-धाम् से मनाया जा रहा है , उसी क्रम में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी नगर पंचायत खड्डा में जटाशंकर पोखरा के रामलीला मैदान में सन्त शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयन्ती धूम-धाम से मनाया गया।नगर में प्रभात् फेरी भी लगा। इस अवसर पर रविदास जी की प्रतिमा पर फूल माला (पुष्प)अर्पित कर उनके जीवनी पर प्रकाश डालते हुए मुख्य अतिथि खड्डा टाऊन एरिया के प्रथम चेयरमैन व पूर्व विधायक दीपलाल भारती ने कहा कि भक्तिकालीन संत व कवि रविदास का जीवन व उनकी शिक्षाएं अत्यंत प्रेरक हैं। वे महान आध्यात्मिक समाज सुधारक थे। उन्होंने कहा मनोवांक्षित जन्म किसी के वश की बात नहीं है। जन्म ईश्वर के हाथ में है। सभी ईश्वर की संतान हैं अत: जन्म के आधार पर भेदभाव करना ईश्वर की व्यवस्था को नकारने जैसा है। उन्होंने कहा था कि रैदास जन्म के कारणै, होत न कोई नीच। नर को नीच करि डारि हैं, औछे करम की कीच।। मान्यता है कि संत रविदास ने तपोबल से सिद्धियां हासिल कीं, चमत्कार किए, लेकिन कभी अहंकार नहीं किया।
उन्होंने घृणा का प्रतिकार घृणा से नहीं, बल्कि प्रेम से किया। हिंसा का हिंसा से नहीं, बल्कि अहिंसा और सद्भावना से किया। इसलिए वे प्रत्येक व्यक्ति के प्रेरणास्त्रोत बने। उन्होंने निर्भीकता से अपनी बात कही। समाज को नई राह दिखाई और कुरीतियों को दूर करने के लिए सच और साहस को आधार बनाया। संत रविदास को वेदों पर अटूट विश्वास था। वे सभी को वेद पढ़ने का उपदेश देते थे।
इस अवसर पर अम्बेडकर सेवा समिती के अध्यक्ष सुबास गौतम,शिक्षक मुन्नीलाल,नौमी प्रसाद,विंदेश्वरी प्रसाद,उमेश,विजय कुमार,सुनील कुमार सेन,राम आसरे ने संत रविदास के चित्र पर पुष्प अर्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर अपने-अपने विचार रखे। कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया है।

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