बताते चले किसान विरोधी अध्यादेशों को वापस लेने की माँग को लेकर किसान आन्दोलन करने पर मजबूर है। किसान जाडे के महीने से लेकर गर्मी का महीना भी शुरू हो गया है और आंदोलन का सौ दिन से ऊपर हो गया मगर किसानों की जायज मांगों के ऊपर केन्द्र की भाजपा सरकार ध्यान नही दे रही है और किसानों के ऊपर अपनी तानाशाही दिखाकर कर उनकी आवाज को दबाना चाहती है जो सम्भव नही है। किसानों ने भी ठान लिया है कि जबतक केन्द्र की भाजपा सरकार न्यूतम समर्थन मूल्य, स्वामीनाथन आयोग और तीनों किसान विरोधी अध्यायदेशों को वापस लेने के लिए घोषणा नही कर देती है तबतक किसान दिल्ली के बॉर्डर पर डटे रहेगे चाहे उसके लिए किसानों को दूसरा सेंचुरी क्यों न लगाना पड़े। उक्त बातें पूर्व सैनिक संगठन वेटरनस एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान मोर्चा व भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) के जिलाध्यक्ष, कुशीनगर रामचन्द्र सिंह ने पत्रकारों के सवालों के जबाब देते हुए बताया। आगे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सिंह ने बताया कि हमारा दोनों संगठन दिल्ली के बॉर्डर पर अपनी माँगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहा है यदि जरूरत पड़ी तो गोरखपुर मण्डल के किसान दिल्ली पहुँचने में देर नही लगायेंगे।

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