गोरखपुर/वायरलेस सेट पर एक आवाज़ गूंजी और शहर कोतवाल की एक लंबी पारी का अंत हो गया ।
लंबे समय तक शहर कोतवाल के पद पर बने रहने का रिकॉर्ड बनाने वाले कोतवाली थाने के प्रभारी निरीक्षक जयदीप वर्मा को बीती रात वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जोगिंदर सिंह ने लाइन हाज़िर कर दिया।
हलांकि अभी नए कोतवाल के नाम का खुलासा नहीं हो सका है लेकिन
होली और शबे बारात जैसे पर्व के ऐन पहले शहर कोतवाल पर गिरी गाज को सीएम की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।
चंद्र गणना और पंचांग के अनुसार इस बार होली और शबे बरात का पर्व आपस में टकरा रहा है । चंद्र गणना के अनुसार होलिका दहन वाली रात ही शबे बरात का पर्व हो सकता है।
बताते चलें की शबे बारात के पर्व पर मस्जिदों व मजारों पर सजावट की जाती है इस दिन सभी कब्रिस्तानों की साफ-सफाई के बाद रात में मुस्लिम धर्म में आस्था रखने वाले अपने अपने पूर्वजों, रिश्तेदारों और इस दुनिया को अलविदा कह चुके अपने सगे संबंधियों की कब्रों पर जाकर फातिहा पढ़ते हैं। घरों और मस्जिदों में रात भर खास इबादत का दौर चलता है ।
वहीं दूसरी ओर होलिका दहन का सबसे बड़ा आयोजन कोतवाली सर्किल के राजघाट थाना क्षेत्र के पांडेहाता में होता है, शहर की बड़ी कब्रिस्तानों में शामिल मुबारक खां शहीद कब्रिस्तान भी इसी रूट पर स्थित है।
कुल मिलकर गोरखपुर शहर में कोतवाली सर्किल में इन दोनो पर्वों पर खास चहल-पहल होती है । वैसे भी त्योहारों, खासकर होली पर्व के पूर्व के अनुभव को देखते हुए यह सर्किल सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। ऐसे समय में स्थानीय परिस्थितियों और जन भावनाओं की समझ रखने वाले पुराने कोतवाल की विदाई और नए कोतवाल की आमद अभिसूचना विभाग के साथ ही साथ आने वाले नये निरीक्षक के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

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