बताते चले एक तरफ तो सरकार विगत चार वर्षों में गन्ने के मूल्य में एक भी रुपया की बढ़ोत्तरी नही करके किसानों के कमर को तोड़ दिया है और किसानों का गन्ना खेतों में ही सुख जाने, खाद, डीजल, खाद्य सामग्री,गैस तथा अन्य बस्तुओं के दामों में अधिक मात्रा में बृद्धि करके सरकार किसान, गरीब, मजदूर जनता का हाल खस्ता करने में लगी है। ऐसी परिस्तिथि में जनता जाय तो जाय कहाँ? जनपद कुशीनगर में नीलगाय के आतंक से किसानों का गन्ना, मक्का, गेहूँ आदि फसलों का नुकसान हो रहा है किसान बेहाल और परेशान है और जिला प्रशासन मौन धारण किये हुए है। यदि ऐसे ही नीलगायों से किसानों के फसलों का नुकसान होता रहा तो किसान की माली हालत बिल्कुल दयनीय हो जायेगी और किसान और उनके बच्चे भुखमरी के कगार पर पहुंच जायेगें उक्त बाते वेटरनस एसोसिएशन (पूर्व सैनिक संगठन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान मोर्चा व भाकियू (अ) के जिलाध्यक्ष, कुशीनगर रामचन्द्र सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अवगत कराया। प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से रामचन्द्र सिंह ने जिला प्रशासन को बताया है कि नीलगायों को वन विभाग की टीम को लगाकर इनको पकड़वाकर जंगल में छोड़ा जाय या इनसे निजात पाने के लिये कोई और कारगर उपाय अपनाया जाय ताकि जनपद में हो रहे किसानों के फसलों के नुकसान को बचाया जा सके जो किसान हित में मिल का पत्थर साबित होगा।

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