डाक टाइम्स ।प्रगतिशील कृषकों के फीड बैक को लेकर खरीफ गोष्ठी का आयोजन कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी श्री एस0 राजलिंगम के द्वारा की गयी।
गोष्ठी में किसानों से जुड़ें कई मुददें उठाए गए। किसानों की समस्याओं तथा उसके समाधान हेतु सम्बन्धित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। इस सन्दर्भ में किसानों के परामर्शो को भी ध्यान में रखा गया। बैठक की शुरूआत में किसानों से पूछा गया कि क्या उन्हे किसान फसल बीमा योजना की जानकारी है। किसानों ने इस सन्दर्भ में गन्ना को जल भराव के अन्तर्गत फसल बीमा के अन्तर्गत लाने की बात की। जवाब में जिलाधिकारी ने अधिकारियों से पूछा कि क्या इस सन्दर्भ में शासन को कोई प्रस्ताव गया है यदि गया है तो उसकी कॉपी निकलवाएँ। फसल रोग के सन्दर्भ में धान में होने वाले स्मट रोग के बारे में किसानों ने बताया फिर किसानों की यह शिकायत थी कि वे जान नही पाते कि बीमा हेतु क्लेम कैसे होता है एवं कहाँ करना है। जिलाधिकारी ने पिछले वर्ष के सारे क्लेम के बारे में पूछा तो पता चला कि पिछले साल कुछ 14393 क्लेम आए जिसके तहत 27494664 रुपये दिए गए एवं शत प्रतिशत क्लेम सेटल हो गए।
मक्का किसानों को बाजार में कोई क्रय केन्द्र न होने की शिकायत थी। जिलाधिकारी ने कहा कि एक प्रस्ताव भेजकर शासन को अवगत कराया जाए। उप कृषि निदेशक अरूण कुमार चौधरी ने बताया कि फर्टिलाइजर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
बैठक में पराली जलाने की शिकायतों के सन्दर्भ में भी चर्चा हुई इसके लिए बायो डी कम्पोजर इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। पराली के सन्दर्भ में कितने मामले आए तथा कितने पर कार्यवाही हुई इसके बारे में भी जिलाधिकारी ने पूछा तथा पराली जलाने के खिलाफ कार्यवाही के बारे में भी किसानों को समझाया और पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भी बात की गई।
जिलाधिकारी ने किसानों के लिए हर गाँव में निगरानी समिति बनाए जाने की बात की जिसमें लेखपाल एवं प्रधान भी रहेंगे तथा सभी के मोबाइल नं0 हो जिससे संवाद करना आसान हो जाए।
बैठक में जिलाधिकारी ने किसानों को कृषक उत्पादकता संघ को बनाये जाने हेतु सुझाव दिया उन्होने कहा कि एफ0पी0ओ0 ही आपका भविष्य है। इसमें न्यूतम 11 किसान मिलकर एक उत्पादकता संघ बना सकते है जो एक कम्पनी की तरह कार्य करती है। इस सन्दर्भ में जिलाधिकारी ने बताया कि एफ0पी0ओ0 बनने से सरकार द्वारा कई प्रकार की सहायता भी की जाती है। किसानों द्वारा नलकूप की समस्या के सन्दर्भ में कुछ नलकूप के खराब होने की तथा कई जगह उचित वॉल्टेज नही मिलने की समस्या भी बताई गयी। जिलाधिकारी ने सम्बन्धित अधिकारी को नलकूप की जाँच करके रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
केला उत्पादकों की समस्या थी कि केले को बेचने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई मंडी नही है। इस सन्दर्भ में जिलाधिकारी ने केले के कई उत्पाद हेतु प्रोसेसिंग करने की सलाह दी गयी तथा इसके लिए भी कृषक उत्पादकता संघ बनाए जाने की बात की एंव एक टीम बनाने की सलाह दी जिसे केला अनुसंधान केन्द्र तिरुचिरापल्ली तमिलनाडु भेजा जा सके एवं इस सन्दर्भ में और जानकारी एकत्रित किया जाए। उन्होने कहा कि सफल खेती के लिए किसानों को व्यापारी की तरह सोचना चाहिए।
किसानों ने नील गाय से होने वाले फसल नुकसान का मुददा भी काफी जोर-शोर से उठाया। जिलाधिकारी ने मीटिंग हॉल से ही डी0एफ0ओ0 से बात की तथा किसानों को बन्दूक हेतु लाइसेन्स के लिए आवदेन करने को कहा। बैठक में लीची एवं स्ट्रॉबेरी उत्पादकों की समस्या को भी सुना गया इस सन्दर्भ में कोल्ड स्टोरेज की बात की गई।
गन्ना किसानों तथा गेहूॅ किसान की समस्या को भी उठाया गया। गेहूॅ क्रय केन्द्रों पर ओसाई मशीन नही होने की शिकायत, पेयजल की व्यवस्था नही होने की शिकायत, सोयाबीन/तिल/सूर्यमुखी का बीज सरकारी ऑफिस में नही मिलने की शिकायत जैसे तमाम समस्याओं को सुना गया एवं इसके समाधान हेतु जिलाधिकारी ने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि हमलोग आगे भी मिलते रहेगें एवं कृषि कार्य तथा किसानों को प्राथमिकता पर रखा जाना चाहिए।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती अनुज मलिक, उप कृषि निदेशक अरुण कुमार चौधरी, डिप्टी आर ऐम ओ विनय प्रताप सिंह, कृषि अधिकारी प्यारेलाल, गन्ना अधिकारी- वेद प्रकाश व संबंधित अधिकारीगण तथा जनपद के कृषकों की उपस्थिति रही।

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